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हमारे बारे में

श्री सत्येंद्र कुमार (गुरु जी), संस्थापक निदेशक, “त्रिशूल संस्थान” ने साधारण, वंचित एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवा छात्रों को सरकारी नौकरी हेतु आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के पावन प्रण की पूर्ति हेतु वर्ष 2000 में ही “त्रिशूल संस्थान” की नींव रखी एवं ”गुरु जी” ने अपनी अदम्य जिजीविषा से एक ऐसी विलमण शिक्षण पद्धति का अविष्कार किया जिससे विभिन्न श्रेणी (कमजोर, औसत व अच्छे) प्रतिभाओं के छात्र विभिन्न प्रतियोगिताओं में समान रूप से सफल हो सकें । छात्रों की प्रतिभाओं में भिन्नता का मूल्यांकन कर व्यक्तिक स्तर पर आवश्यक एवं कुशल मार्गदर्शन पर आधारित “गुरु जी” के द्वारा विकसित इस नवाचारी शिक्षण पद्धति से लाभान्वित हो “त्रिशूल संस्थान” के करीब दो दशकों की अद्भुत व अविस्मरणीय सफलता यात्रा में करीब 10 हजार युवा आर्मी (जी. डी., ट्रेडमैन, टेक्निकल, क्लर्क), पैरामिलिट्री (B. S. F., C. R. P. F., C. I. S. F., S.S.B., I. T. B. P.), बिहार पुलिस, मध्यप्रदेश पुलिस, असम राइफल्स आदि में कॉन्स्टेबल, क्लर्क आदि पदों पर चयनित हुए हैं ।

>गुरुकुल पद्धति पर आधारित “त्रिशूल संस्थान” एक पूर्णतः आवासीय कोचिंग संस्थान है जहाँ छात्रों को सरकारी नौकरी हेतु अयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हेतु छात्रों का कुशल मार्गदर्शन किया जाता है । समय के कुशल प्रबंधन से लेकर एक अच्छा नागरिक बनने हेतु आवश्यक सभी मूल्यों के सम्मान हेतु छात्रों को प्रेरित किया जाता है । उचित शिक्षण, स्व अध्ययन एवं मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य के विकास हेतु आवश्यक खेल कूद के उचित समन्वय को संक्षेप में “त्रिशूल संस्थान” कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी । छात्रों के व्यक्तिगत समताओं के आकलन पर आधारित शिक्षण पद्धति “त्रिशूल संस्थान” को इस क्षेत्र में अग्रणी के रूप में स्थापित कर दिया है । अपनी उपलब्धियों को हर वर्ष बेहतर से बेहतर करने की चुनौती को स्वीकार कर “त्रिशूल संस्थान” निरंतर प्रयत्नशील एवं प्रगतिशील है ।